Dashrath Manjhi The Mountain Man Biography In Hindi
Dashrath Manjhi

संघर्ष में आदमी अकेला होता है और सफलता में दुनिया उसके साथ होती है। जिस-जिस पर ये जग हंसा है उसी ने इतिहास रचा है ये चंद लाइने सच उठी है दशरथ मांझी के लिए। जिसने अपनी परेशानी को सब की परेशानी समझा और ऐसा एक काम कर दिखाया जो हर किसी के लिए असंभव था और आज मांझी को उस काम के लिए पूरा भारत जानता है।

तो आइए जानते हैं मांझी ने एक 360 फुट लंबी और 30 फुट चौड़ी वह 25 फुट ऊंची पहाड़ी को काटकर एक सड़क बना डाली और दिन भर में तय होने वाली रास्ते को अब लोग आधा घंटा में पूरा कर लेते हैं।

तो आइए जानते हैं की मांझी के साथ ऐसा क्या हुआ की पहाड़ को काटकर सड़क बनानी पड़ी।

माउंटेन मैन के नाम से जाने वाले मांझी का पूरा नाम दशरथ मांझी था और मांझी का जन्म 14 जनवरी 1929 को बिहार के एक छोटे से गांव गहलौर में हुआ था और गांव की हालत बहुत खराब थी और ना तो गांव में पानी की सुविधा थी ना ही स्कूल और अस्पताल की और इस कारण से गांव को छोटे से छोटे काम के लिए पास के गांव में जाना पड़ता था और इसके लिए एक बहुत ही बड़ी पहाड़ी को पार करना पड़ता था। या पहाड़ी के किनारे से 70 किलोमीटर का रास्ता पार करके जाना पड़ता था।

मांझी एक गरीब परिवार से थे इस कारण से मांझी ने छोटी उम्र में ही घर छोड़ दिया और कोयले की खान में काम करने लग गए। लेकिन कुछ दिनों बाद मांझी वापस घर लौटे और फाल्गुनी नाम की लड़की से शादी कर ली।

मांझी व फाल्गुनी अपने वैवाहिक जीवन से काफी खुश थे लेकिन एक दिन मांझी लकड़ियां काटने गए हुए थे और फाल्गुनी मांझी के लिए खाना लेकर जा रही थी जिसके कारण पहाड़ी से फाल्गुनी का पैर फिसल गया जिसके कारण फाल्गुनी को चोट लग गई और रास्ते में पहाड़ आने के कारण फाल्गुनी को सही समय पर अस्पताल नहीं ले जाया गया जिसके कारण फाल्गुनी की मृत्यु हो गई।

मांझी इस घटना से बहुत दुखी हुए क्योंकि अब उसका साथी इस दुनिया में नहीं था और मांझी ने इसके बाद संकल्प लिया कि वो इस पहाड़ी को काट कर एक रास्ता बनाएंगे जिससे कि गांव वालों को और समस्या ना आए और मांझी ने मात्र एक हथोड़ा व छेनी से इस पहाड़ को काटना शुरू किया।

लेकिन मांझी को ऐसा करते देख गांव वाले उस पर हंसते थे की मांझी पागल हो गए हैं और मांझी को पागल कहते थे और गांव वालों का हंसना भी जायज था क्योंकि मांझी ने उस काम को करना शुरू किया था जो हर किसी के बस की नहीं होती है और अकेला आदमी तो सोच भी नहीं सकता लेकिन मांझी ने गांव वालों की ना सुनते हुए एक हथोड़ा व छेनी से 360 फुट लंबी, 30 फुट चौड़ी वह 25 फुट ऊंची पहाड़ी को चीर दिया और मांझी को ऐसा करते करते पूरे 22 साल लग गए।

लेकिन मांझी ने एक बार भी ऐसा नहीं सोचा कि मैं यह नहीं कर पाऊंगा और 22 साल की मेहनत और जज्बे से पहाड़ी को काट डाला जिसकी वजह से गहलौर और वजीरगंज की दूरी जो पहले 60 किलोमीटर की होती थी वह अब 10 किलोमीटर रह गई है वह स्कूल और अस्पताल की दूरी अब मात्र 3 किलोमीटर रह गई है और आपको यह जानकर हैरानी होगी की मांझी के द्वारा बनाए गए उस सड़क को केवल गहलौर ही नहीं बल्कि आसपास के 60 और भी गांव वाले काम में लेते हैं। इसके बाद मांझी माउंटेन मैन के नाम से जाने जाने लगे और मांझी के कारनामे के लिए 2006 में पदम श्री पुरस्कार यह भी मान जी को सम्मानित किया गया और गहलौर और वजीरगंज तक 3 किलोमीटर पक्की सड़क का निर्माण बिहार सरकार द्वारा करवाया गया और गहलौर गांव में दशरथ मांझी के नाम पर एक अस्पताल भी बनवाया गया।

2012 में केतन मेहता निर्देशन में दशरथ मांझी के जीवन पर एक फिल्म बनाने का निश्चय किया गया जिसका नाम Manjhi The Mountain Man रखा गया और इस फिल्म को 21 अगस्त 2015 को रिलीज किया गया।

नवाजुद्दीन सिद्दीकी के इस नई फिल्म में मांझी का और राधिका आप्टे ने फाल्गुनी का रोल निभाया और मांझी की एक कन्नड़ फिल्म भी रिलीज की गई जिसका नाम Olve Madar रखा गया और अंत में दशरथ मांझी कैंसर की बीमारी को नहीं हरा पाए और दिल्ली की एम्स हॉस्पिटल में 17 अगस्त 2007 को यह दुनिया को अलविदा कह गए।

मांझी का अंतिम संस्कार बिहार सरकार द्वारा राजकीय सम्मान से किया गया। दशरथ मांझी तो इस दुनिया में नहीं है पर उनके द्वारा किए गए इस काम को आज भी पूरा भारत और गहलौर के आसपास के 60 गांव भी याद करते हैं और इन गांव वालों का काम इतना सरल हो गया है इसके लिए वह दशरथ मांझी को भूल नहीं पाएंगे। जो पहले मांझी को पहले पागल कह कर बुलाते थे अब वह मान जी के साथ खड़े हैं

तो यह थी दोस्तों दशरथ मांझी की पूरी कहानी। तो कैसा लगा आपको हमारा यह आर्टिकल हमें कमेंट करके जरूर बताएं और अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें।

धन्यवाद।

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